जो तेरी गलती बिसरा ना सके...!!!
जो तेरी गलती बिसरा ना सके...!!! *************************** वो मां वो मेरी प्यारी सी मां साए में जिसके पला बढ़ा खेला कूदा और मजे किया आज जहां भी पहुंचा हूं मां बस तेरी ही तो बदौलत है तेरी रहमत का कर्ज तो मैं ता उम्र चुका ना पाऊंगा बिक भी जाऊं गर मैं तो एहसान तेरा दिल पर होगा क्या स्वार्थ था तेरा जो तूने इस नटखट को इंसान बनाया क्या चाहा था तूने बदले में सोना चांदी मिल जाएगा? क्या महल दुमहले क़दमों पर तेरे आकर बिछ जाएंगे? कोई चाह ना थी तेरी ममता में एक इस चाहत के परे ओ माता पढ़ लिख कर लाल ये तेरा जग में नाम कुछ कमा जाए उमर के इस पड़ाव में क्या दिया है हमने तुझको मां एक वीरान दुनिया एक सूना पन और एक खालीपन जीवन में अंधियारे में डूबी रातें गुमनाम जिंदगी का साया और घुटन भरा जीवन सारा होते ही बड़े हमने तुझको सुहाग से तेरे जुदा कर डाला बांटा ऐसे मां और बाप को अस्तित्व तक उनका नकार डाला मजबूर किया उन दोनों को जुदा जुदा रहने को हमने चंद पैसों की खातिर ही तो हम सब ने आपस में मिलकर उनके प्यार का सौदा कर डाला खून के आंसू रोने को हमने उन्हें मजबूर ...